हम थे कुछ भी नहीं .......

हम थे कुछ भी नहीं .......


हम थे कुछ भी नहीं मगर उसने हीरा कह दिया,
खाक थे जो  फर्श के एक लफ्ज ने अर्श कह दिया।

 सोचा न था के हमें होगी एसे उनसे  दिल्लगी कभी,
 साथ ही मिला कुछ एसा के हमने  इश्क कह दिया।

वादें इकरार जो हुए चाहे न हुए  पूरे  दिलो के कभी,
मगर साथ रहा कुछ एसा के हमने वफा कह दिया ।

तकरारो का क्या वो तो हुई इश्क मे उनसे भी बहुत,
मगर पास थे वो हमारे तो हमने  इकरार कह दिया।

कब्जा करने की आदत न थी हममे गैरो को कभी,
वो देख ही गये कुछ एसा के हमने अपना कह दिया।

जितना भी रहा जब तक रहा साथ हमारा  प्यारा था,
सोचता हूं क्या नाम दूं तो एक पन्ना अधूरा कह दिया।

आज पास नहीं है  फिर भी जिंदा है वो हरकतो में हमारी,
जिंदादिली सीखा गये जो हमने उसे ज्योति
कह दिया।।



 # पवन कुमार वर्मा।


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